स्वामी आलोक पुरी जी महाराज एक हिंदू आध्यात्मिक आचार्य, व्याकरणाचार्य, कथावाचक, संत, गुरु एवं ज्योतिष व कर्मकांड यज्ञ अनुष्ठान के ज्ञाता हैं। आप 'सनातन सप्तर्षि अखाड़ा' के महामंडलेश्वर हैं और आपके आश्रम दिल्ली एवं प्रयागराज में स्थित हैं।.
संक्षिप्त परिचय
धर्म: हिंदू
सम्प्रदाय: पंचदशनामी सम्प्रदाय
मंदिर: श्री बालाजी आश्रम, संड़वा कला, नैनी, प्रयागराज
अखाड़ा : श्री निरंजनी अखाड़ा
व्यक्तिगत विशिष्टता एवं शिक्षा
राष्ट्रीयता: भारतीय
जन्म स्थान: ग्राम-बेलहा, जनपद-चित्रकूट, उत्तर प्रदेश
शिक्षा: स्नातक, परास्नातक, व्याकरणाचार्य, ज्योतिर्विद।
गुरु : रविन्द्र पुरी जी महराज अखाडा परिषद अध्यक्ष
गुरु : ब्रह्मर्षि स्वामी चंद्रमणि पुरी जी महाराज आचार्य महामंडलेश्वर सनातन सप्तर्षि अखाडा
पद व गुरु परंपरा
पद: श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर, ब्रह्मर्षि सनातन सप्तर्षि अखाड़ा श्री निरंजनी।
गुरु: स्वामी रविन्द्र पुरी जी महाराज एवं स्वामी कंचन पुरी जी महाराज। कार्य क्षेत्र: धर्माचार्य, श्रीमद्भागवत कथा, यज्ञ अनुष्ठान, कुंडली विशेषज्ञ तथा समस्त धार्मिक सामाजिक कार्य। प्रारंभिक जीवन स्वामी आलोक पुरी जी का जन्म उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले के बेलहानामक गाँव में अपने ननिहाल में हुआ था। उनका पैतृक निवास मोहीउद्दीनपुर, कौशाम्बी में है। वे एक सरयूपारीण ब्राह्मण (करंजही शुक्ला परिवार) के कुलदीपक हैं। उनका परिवार एक वैद्य घराना था और उनके परदादा पंडित श्री सूर्यनारायण शुक्ल 'वैद्य जी' के नाम से प्रसिद्ध थे। स्वामी जी के पिता श्री किशोरी लाल शुक्ल ने उन्हें बचपन से ही पूजा-पाठ और धर्मकर्म की शिक्षा दी। स्वामी जी जन्म से ही त्रिकाल संध्या व शिव-शक्ति के उपासक रहे हैं। उन्होंने संगम किनारे प्रयागराज में गंगा की गोद में बैठकर तप और भक्ति की, साथ ही नि:शुल्क रुद्राभिषेक जैसे सामाजिक कार्य आयोजित किए। आध्यात्मिक यात्रा और उपलब्धियाँ तपस्या के लिए जब स्वामी जी हरिद्वार गए, तो वहां उनकी भेंट अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष स्वामी रविन्द्र पुरी जी से हुई। उनसे गुरु-दीक्षा लेकर वे 'स्वामी आलोक पुरी' के नाम से निरंजनी अखाड़ा में शामिल हुए। बाद में, 'सनातन सप्तर्षि अखाड़ा' के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी चंद्रमणि पुरी जी '1008 महामंडलेश्वर' की उपाधि से अलंकृत किया। संस्था: वर्तमान में आप 'संगम समागम चैरिटेबल ट्रस्ट', प्रयागराज के अध्यक्ष हैं। मीडिया: आप विभिन्न टीवी चैनलों जैसे DD News, आजतक आदि और कुंभ मेला जैसे बड़े आयोजनों में नियमित वक्ता के रूप में सक्रिय रहते हैं। भाषा ज्ञान: आप हिंदी, अंग्रेजी और संस्कृत भाषाओं के विद्वान और लेखक हैं।आध्यात्मिक यात्रा और सम्मान स्वामी आलोक पुरी जी जब तपस्या के लिए हरिद्वार गए, तब उनकी भेंट अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्री रविन्द्र पुरी जी (मनसा देवी मंदिर के अध्यक्ष) से हुई। स्वामी रविन्द्र पुरी जी से गुरु-दीक्षा लेने के बाद, उन्होंने 'स्वामी आलोक पुरी' नाम से निरंजनी अखाड़ा में प्रवेश किया। इसके बाद, गुरु जी के सानिध्य में 'सनातन सप्तर्षि अखाड़ा' के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी चंद्रमणि पुरी जी 'श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर' की उपाधि से अलंकृत कर प्रमाणपत्र प्रदान किया। वर्तमान में स्वामी आलोक पुरी 'संगम समागम चैरिटेबल ट्रस्ट', प्रयागराज के अध्यक्ष हैं, जिसके सदस्य भारत और विदेशों में भी हैं। सम्प्रति वे एक प्रसिद्ध ज्योतिषी, कथावाचक और कर्मकांडी के रूप में कार्य कर रहे हैं। आध्यात्मिकता और मीडिया मीडिया उपस्थिति: स्वामी जी विभिन्न टीवी चैनलों जैसे DD News और आजतक पर नियमित रूप से दिखाई देते हैं। प्रमुख आयोजन: वे कुंभ मेला जैसे बड़े आयोजनों में एक नियमित वक्ता (Speaker) के रूप में कार्य करते हैं। लेखन और भाषा: वे एक आध्यात्मिक गुरु, संत और आचार्य होने के साथ-साथ हिंदी, अंग्रेजी और संस्कृत भाषाओं के विद्वान और लेखक भी हैं। उनके अनेक भक्त और अनुयायी हैं जो उनके दिखाए मार्ग का अनुसरण करते हैं।
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